गांव की सरकार बनाने के लिए रसोई मे चोके चूल्हे तक सीमित रहने वाली गृहणियो की राजनीति के जंग मे कूदने की तैयारियां शुरू हो गयी।
गांव की सरकार बनाने के लिए रसोई मे चोके चूल्हे तक सीमित रहने वाली गृहणियो की राजनीति के जंग मे कूदने की तैयारियां शुरू हो गयी।
जब से आरक्षण लाटरी निकली। महिलाओं की चुनाव को लेकर उत्सुकता बढने लगी।बीगोद ग्रामपंचायत संरपच सीट लोटरी मे सामान्य महिला सीट इस चुनाव के लिए घोषित हुई। पूर्व संरपच महिलाओं की जान मे जान आ गयी। वे भी अपनी उम्मीदवारी जताने के प्रयास मे जुट गयी। पूर्व संरपचो ने भी अपने परिवार से महिलाओं को संरपच के लिए खडे़ करने का मानस बना लिया। आरक्षण लोटरी खुलने के साथ ही गांव की चुनावी चौसर बिछने लग गयी। कई नेताओ ने अपने परिजनो को चुनाव में उतारने का मानस बना लिया है। गावों मे जहा जहाँ संरपच या वार्ड पंच केलिए महिला सीट आरक्षित हुई। वहां वहां नेता अपनी बीबी, पुत्र वधु, पुत्रियां,पोत्रीयां सहित परिवार की महिलाओं को चुनावी जंग मे उतारने के लिए वोट की गणित लगाने लगे है। मतदाताओ से विचार विमर्श करते दिखाई दे रहे है। चर्चा मे तो संरपच के लिए सम्भावित उम्मीदवार नामों की सूचि निरन्तर बढ रही है।लेकिन आवेदन फार्म भरने एवं उठाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगा। बीगोद मे संरपच चुनाव स्थानीय दिग्गज नेताओ के लिए बडा़ ही प्रतिष्ठा का सवाल रहेगा। मतदाता बीते पांच के जनप्रतिनिधियो के कार्यकाल को देखकर ही निर्णय लेगे।
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