पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ मानव सभ्यता के लिए प्रकृति व गोवंश संरक्षण जरूरीः आचार्य ज्ञान सागर महाराज

01 Feb 2020, 10:05


जहाजपुर समाचार (रवि जोशी)
जहाजपुर का स्वस्तिधाम बना धर्म का केंद्र, राज्यपाल कालराज मिश्र ने भी की शिरकत, देशभर से आए श्रद्धालु
जहाजपुर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को स्वस्तिधाम परिसर में जैन संतों की मौजूदगी में सुबह से रात तक कई धार्मिक अनुष्ठान हुए। धर्मसभा में एक तरफ जैन संतों ने धर्म मार्ग पर चलने की अपील की, वहीं बतौर मुख्य अतिथि समारोह में शामिल हुए राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी जैन संतों के तप व कर्म से सीख लेने की बात कहते हुए मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की अपील की। आधुनिक पांडाल में भव्य मंच पर संतों के अलावा इंद्र-इंद्राणियों के वेश में विराजमान श्रावक-श्राविकाओं की आस्था भी देखते बन रही थी। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़े काफी गहरी है। पूर्व में कई विदेशी यहां औए ओर यहां की संस्कृति को नुकसान पहुचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी बावजूद आज भी भारतीय संस्कृति अडिग हैं। भारतीय संस्कृति में आध्यात्म है। आज की पीढ़ी को चाहिए कि वो भारतीय संस्कृति को पहचाने और इसका अनुसरण करे। उन्होंने कहा कि प्रकृति पर्यावरण व गोवंश बचेगा तभी भारतीय संस्कृति बचेगी। आर्यिका रत्न स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि जीवन में बड़ा काम करने के लिए व्यक्ति का सरल होना जरूरी है। उन्होंने जैन धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि जैन धर्म मानव कल्याण के साथ ही सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने की सीख देता हैं। इस दौरान मंच से आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अतिथि राज्यपाल कलराज मिश्र को प्रतीक चिन्ह भेंट किया। राज्यपाल ने मंच पर विराजमान जैन संतों से आशीर्वाद भी लिया। इस दौरान स्थानीय विधायक गोपीचंद मीणा, पंचकल्याणक आयोजन महोत्सव समिति जहाजपुर के अध्यक्ष विनोद जैन टोरड़ी, महामंत्री ज्ञानेंद्र जैन, कार्याध्यक्ष जयकुमार कोठारी, विनोद कुमार जैन, पारस जैन, महावीर प्रसाद पौद्धार, पवन सोनी, अशोक बडजात्या, प्रचार प्रसार के प्रभारी मनोज जैन आदिनाथ, दानमल जैन, पूर्व विधायक प्रधान शिवजी राम मीणा, नगर अध्यक्ष राजीव काटिया, पूर्व पालिकाध्यक्ष गेगाराम मीणा, दिनेश पत्रिया सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।

सुबह से रात तक चले अनुष्ठान, बही भक्ति की सरिता
पंचकल्याणक आयोजन महोत्सव समिति जहाजपुर के अध्यक्ष विनोद जैन टोरड़ी, महामंत्री ज्ञानेंद्र जैन ने बताया कि स्वस्तिधाम में सुबह से रात तक धार्मिक अनुष्ठान हुए। सुबह मूलनायक अभिषेक एवं शांति धारा, जाप अनुष्ठान, अभिषेक एवं शांतिधारा, नित्य पूजा, सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, कुंभ कलश स्थापन, मंगल कलश स्थापन, अखंड ज्योति स्थापन, अष्ट मंगल का आयोजन हुआ। रात को याग मंडल विधान, गुरु भक्ति, मंगल व शास्त्र सभा, इंद्र दरबार, तत्व चर्चा सिंहासन, कम्पायमान, कुबेर का आगमन, रत्नवृस्ति, राजगृही की रचना, महाराजा सुमित्र का दरबार, अष्ट कुमारियों द्वारा आज्ञा, माता की सेवा, सोलह स्वपन दर्शन व गर्भ कल्याण का आयोजन देखने को मिला। जहाजपुर में नवनिर्मित ऐतिहासिक स्वस्तिधाम परिसर में आठ दिवसीय श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ 7 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम में भीलवाड़ा, कोटा, उदयपुर, चित्तोड़, जयपुर, देवली, टोंक, निवाई सहित देशभर से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पहंुचे।

राज्यपाल की अगवानी को पहंुचे आयोजन समिति के पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि*
प्रचार प्रसार के प्रभारी मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि सुबह पौने 11 बजे राज्यपाल कलराज मिश्र हवाई मार्ग से जहाजपुर पहंुचे। यहां जनप्रतिनिधियों व आयोजन समिति पदाधिकारियों ने राज्यपाल की अगुवानी की। यहां से राज्यपाल को आयोजन स्थल लेकर पहंुचे। मंच पर राज्यपाल ने संतों से आशीर्वाद लिया।

शक्ति रहे, लेकिन इसका दुरूपयोग न होः राज्यपाल
विश्वशांति महायज्ञ को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि जितने भी तीर्थंकर व जैन मुनि हुए है उन सभी की एक ही सोच रही है कि मानव कल्याण के लिए सकारात्मक भाव से अधिक से अधिक कार्य हो। उन्होंने कहा कि हम शक्तिशाली रहे, लेकिन अपनी शक्ति का कभी दुरूपयोग न हो। जीवन में क्षमादान को अपनाते हएु अहिंसा के मार्ग पर चलने की जैन तीर्थंकर भी सीख देते है। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में सत्य अहिंसा का भाव जागे उनमें मानव कल्याण के भाव पैदा हो इसके लिए हर संभव प्रयास हो। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राज्यपाल संवेदानिक पद है। भारत का संविधान हमारे वेदों, धर्म ग्रंथों व पौराणिक तथ्यों का सम्मिश्रण है। हमारा संविधान सामाजिक समरसता की बात करता हैं। जैन धर्म की बातों को अगर अमल में
लाया जाए तो विश्वशांति होने में समय नहीं लगेगा। जहाजपुर पवित्र स्थल है इसी का परिणाम है कि आज यहां स्वस्तिधाम देखने को मिल रहा है। जैन तीर्थंकरों का अवलोकन करे तो पाएंगे कि आध्यात्मिकता के आधार पर भारतीय संस्कृति को आधारशाीला मानते हुए समाज में रहने वाले मानव समाज का कुशलक्षेम कैसे हो इसी तीर्थंकरों ने चिंता करी है। जैन संतों ने हमेशा से जन कल्याण, किसान कल्याण की बात कहीं है। उन्होंने कहा कि जहाजपुर में स्वस्तिधाम बनने से यहां के विकास को बढ़ावा मिलेगा और इस स्थान की देश में एक नई पहचान कायम होगी।

लोकेश सोनी एडिटर

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