महाप्रभु त्रिशताब्दी महोत्सव का आगाज,भव्य जनसैलाब के साथ निकली सोभायत्रा

भीलवाड़ा नाउ
*_शाहपुरा।किशन वैष्णव*!रामनिवास धाम शाहपुरा में रामरामस्नेह संप्रदाय का मुख्यालय रामनिवास धाम शाहपुरा में पीठाधीश्वर रामदयाल महाराज के सानिध्य में महाप्रभु त्रिशताब्दी महोत्सव 2 फरवरी से जिसको लेकर भव्य जनसैलाब के साथ निकली शोभायात्रा । भारी जन समूह ने कलश यात्रा और हाथी घोड़ा पालकी के साथ पुष्प वर्षा हुई।यह महोत्सव 2 फरवरी से 8फरवरी तक रहेगा।रामनिवास धाम शाहपुरा में ये कार्यक्रम पूरे जनवरी माह चलेगा।शाहपुरा में महाप्रभु स्वामी रामचरण प्राकट्य त्रिशताब्दी समारोह का आगाज होने के साथ भव्य कलश यात्रा व शोभायात्रा निकल रही है। हजारों की तादाद में महिला पुरूष शामिल है। धरती देवरा वाटिका से रामनिवास धाम पहुंचेगी। करीब तीन किमी लंबी शोभायात्रा का नजारा देखते ही बन रही है। पुलिस व प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किये गये है। पुलिस उपाधीक्षक भारत सिंह व सीआई प्रकाश भाटी की अगुवाई में पांच थानों के एसएचओ व अतिरिक्त जाब्ता लगाया गया है।महिलाओ ने कलश के साथ यात्रा में शामिल हुई।राम नाम के जय कारो और भजनों से सोभायात्रा में जन सैलाब के मुंह से निकली राम नाम की धुन से शाहपुरा सहित आस पास के क्षेत्र गूंज उठा।शाहपुरा तहसील सहित कहीं तहसीलों एवं जिलों के श्रद्धालुओ की भी भारी भीड़ देखने को मिली। गालियां और चोबारे एक मंत्रमुग्ध राम धुन से गूंज उठे।संप्रदाय के संस्थापक आध्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरण महाप्रभु का प्राकट्य त्रिशताब्दी महोत्सव 2 से शुरू हुआ भव्य सुभारंभ के साथ आयोजित किया जा रहा है जो 8 फरवरी तक विराट रूप से मनाया जाएग।2 से 7 फरवरी तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा जिसमें देश के विख्यात संत महात्मा महाप्रभु का आगमन होगा।अंतिम दिवस 8 फरवरी को सोडा तहसील मालपुरा में दिन भर का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगा।सोडा मालपुरा में कार्यक्रम मनाए जाने का कारण यह है कि स्वामी रामचरण महाराज का जन्म राजस्थान प्रदेश के सोड़ा ग्राम में हुआ। इनके बचपन का नाम रामकिशन तथा जाति से विजयवर्गीय कापड़ी गौत्रिय थे। स्वामी रामचरण महाराज की जन्मस्थली सोड़ा उनके जन्म के समय जयपुर राज्यान्तर्गत थी। जिसको सूरसेन ग्राम के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में इनका पैतृक गांव बनवाड़ा टोंक जिले की पीपलू तहसील तथा ननिहाल जन्म स्थान गांव सोड़ा टोंक जिले की मालपुरा तहसील में स्थित है। इसी कारण से संप्रदाय के महापुरुष इस जगह को मान्यता देते हैं। एवं कार्यक्रम आयोजित करते हैं।अंतिम दिवस 8 फरवरी को सोडा तहसील मालपुरा में दिन भर का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगा।_
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