मृत्युभोज एक अभिशाप

पवन बावरी(भीलवाड़ा)
सामान्य परिवार की महिला धन्नी देवी योगी ने अपने ससुर देवी नाथ योगी का 6 दिसंबर को स्वर्गवास होने पर समाज के पंच पटेलों के भारी दबाव के बावजूद भी धन्नी देवी योगी ने तथा उनके पति गोपाल नाथ योगी एवं दोनों पुत्र दिनेश नाथ व विकास नाथ ने मृत्यु भोज नहीं करने का निर्णय लिया और 4 से 5 लाख के खर्च की जगह सिर्फ एक नारियल का धूप लगाकर क्रिया कर्म पूर्ण कियाख़ुशी की बात है कि इस सराहनीय कार्य में धन्नी देवी योगी का महत्वपूर्ण योगदान है।धन्नी देवी ने 2002 से मृत्युभोज नही खाने की शपथ ली और स्वयं अपने घर से शुरुआत करके समस्त मृत्युभोज करने वाले समाजों के लिए प्रेरणादायी बन गई। धन्नी देवी के इस निर्णय को सुनकर मृत्यु भोज पाबंदी चाहने वाले युवाओं की टीम से भीलवाड़ा से शैतान योगी, ओम रावल, कालू योगी, मुकेश योगी, प्रकाश योगी, ओम प्रकाश योगी आदि 6 कार्यकर्ता रविवार सुबह धन्नी देवी जी एवं उनके परिवार से मुलाकात करके आए और इस प्रेरणादायक कार्य से अन्य युवाओं को अवगत कराने की शपथ ली
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